Tuesday, March 6, 2012

स्मृति लेख : ४५ मिनट



२ अगस्त २०११ , ००:४४ 

"जुम्बिश , हरकत , आवाज़ , नज़र सब छीन गयी , कोशिश मेरी 
पौना घंटा यूँ गुज़र गया मन की मन में, बस बात रही |

एक यादगार तोहफे के लिए 
तस्वीर बनानी थी तेरी 
पर कांप रहे थे हाथ मेरे 
वो दे न सका अच्छे के लिए |

कुछ लफ्ज़ गूंथने चाहे थे तुक में वो बात नहीं बैठी 
और शब्द हमारे बर्फ हुए कोशिश तो हुई , फूटे ही नहीं | 

वो चार निवाले हाथो से 
दो लफ्ज़ो से भारी निकले 
इतनी खुशियाँ न सह पाए 
नम गाल लिए रुखसत ले ली |

अब दाग लिए फिरते हैं सालन जो कमीज़ पे सूख गया 
अब उसकी एक कहानी है कुछ दाग सही अच्छे के लिए | "

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